ओपेक (आर्गनाईजेसन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कन्ट्री)
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| ओपेक चिन्ह |
यह एक अंतर सरकारी संस्था है। यह संस्था दुनिया के तमाम देशों में पेट्रोलियम का निर्यात करती है। इसकी स्थापना इराक के बगदाद शहर में सितंबर 1960 में हुई थी। इस संस्था के संस्थापक जुआन पाब्लो और अब्दुलाह तारिकी थे। इसका मुख्यालय अस्ट्रिया के वियना शहर में है। स्थापना के समय इस संगठन में मात्र 5 सदस्य ही थे। आज इसके कुल मिलाकर 13 सदस्य हो चुके है। जिनमें अलजीरिया, अंगोला, कोन्गो, इकुआटोरियल गुआना, गबोन, ईरान, ईराक, कुवैत, लीबिया, नाईजीरिया, साऊदी अरब, यु.ए.ई, और वेनेजुएला के नाम शुमार है। बता दें कि जनवरी 2019 से पहले ओपेक देशों की संख्या 14 थी। परंतु कुछ विवादों के चलते 1 जनवरी 2019 को कतर इस संस्था से बाहर हो गया।
स्थापना का उद्देश्य
ओपेक संस्था को शुरु करने का उद्देश्य दुनिया भर में निर्यात किये जा रहे पेट्रोलियम के
दामों को नियंत्रित करना था। ओपेक की स्थापना से पहले पेट्रोलियम के दाम एक जैसे
नहीं होते थे। हर देश अपने मुताबिक पेट्रोलियम के दाम तय करता था। इसके चलते
पेट्रोलियम निर्यातकर्ता देशों के बीच असमंजस की स्थिति पनपति थी। यही एक बड़ा
कारण रहा, जिसके चलते ओपेक संस्था का उद्भव हुआ। यह संस्था सदस्य देशों के बीच
पेट्रोलियम नीति को समन्वित करती है। इस कारण पेट्रोल की उचित और सुनिश्चित कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सामने आती हैं। इसके अलावा यह संस्था मांग के आधार पर पेट्रोलियम
की आपूर्ति को नियंत्रित करती है।
ओपेक में सबसे ज्यादा पेट्रोलियम कौन सा देश उत्पादन करता है?
ओपेक के
13 देशों में पेट्रोलियम का सबसे ज्यादा उत्पादन साऊदी अरब करता है। आंकडों की
माने तो 32,751 मिलियन बैरल पेट्रोलियम ओपेक प्रतिदिन उत्पादन करता है। इसमें
अकेले साऊदी अरब की हिस्सेदारी करीबन 32 प्रतिशत के आसपास है। इस आधार पर करीबन
11,000 मिलियन बैरेल पैट्रोलियम का उत्पादन साऊदी अरब रोजाना करता है। इसके बाद
इराक दूसरे और ईरान तीसरे नंबर पर है। आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें कि ओपेक
तेल बाजार में दामों को नियंत्रित तेलों की स्पलाई चैन को प्रभावित करके करता है।
भारत और ओपेक
भारत
दुनिया में पेट्रोलियम आयात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। हम अपनी
जरूरत का 80 प्रतिशत तेल ओपेक देशों से आयात करते हैं। इनमें साऊदी अरब भारत का
सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। इकोनोमिक टाइम्स में छपे एक आर्टिकल की माने तो 2018-19
में साऊदी अरब ने हमें 4.03 करोड़ टन के कच्चे तेल का आयात किया।
ओपेक प्लस
ओपेक
प्लस की स्थापना दिसंबर 2016 में हुई। इसमें 10 अन्य तेल उत्पादक देश ओपेक साथ
जुड़े, जिनमें मेक्सिको, कजाखिस्तान, रूस, सूडान, साऊथ सूडान, ब्रुनेई, बहरेन, ओमान,
अजरबईजान और मलेशिया थे। इस समझौते को ओपेक प्लस नाम दिया गया। इसमें कुल मिलाकर
उस दौरान 24 (कतर जनवरी 2019 में ओपेक को छोड़ दिया) देश थे। ओपेक प्लस के 24 देश
मिलकर दुनिया के 55 प्रतिशत पट्रोलियम निर्यात को नियंत्रित करने लगे। इसके चलते
इन 24 देशों का वृहत्तर प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा। आपकी जानकारी
के लिए बता दें कि अमरीका ओपेक प्लस का हिस्सा नहीं है।


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